मित्र-मंडली

Sunday, 13 October 2013

मैं एक शैतान हूँ।

ज्ञान का अभाव हूँ।
अज्ञान का सरताज हूँ।।
इसलिए मई एक शैतान हूँ।।।

अनजाने पथ पर लापता हूँ।
हर नियम से बेपरवाह हूँ।।
हाँ इसलिए मई एक शैतान हूँ।।।

आधे भरे घड़े का छलकता जल हूँ।
भावनाओं के बहते पानी का एक झलक हूँ।।
और कम क्या बोलूँ इसलिए मैं एक शैतान हूँ।।।

सब कुछ कर जाने के सपने का एक तिलस्म हूँ।
कर जाने के बाद पश्तावे का एक मिशन हूँ।।
हाँ इसलिए मैं एक शैतान हूँ।।।

खुद में बैठे इस शैतान से खुद का कर रहा सर्वनाश हूँ।
हे भगवन! इस विजय दशमी इस शैतान का नाश हो...
कम से कम यह शैतान मरने से पहले कह तो सके हाँ मैं भी एक इंसान हूँ।

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